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एमडीडीए का अवैध कॉलोनियों पर बड़ा प्रहार: अजबपुर कला में 8 बीघा पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त

देहरादून: राजधानी में बिना अनुमति और नियमों को ताक पर रखकर बसाई जा रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को प्राधिकरण की टीम ने अजबपुर कला के सरस्वती विहार इलाके में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए लगभग आठ बीघा जमीन पर की जा रही अवैध प्लॉटिंग को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

​कार्रवाई के दौरान मौके पर अवैध निर्माण और सीमांकन (बाउंड्री) को हटा दिया गया। साथ ही आम जनता को सचेत करने के लिए विभाग की ओर से वहां एक चेतावनी बोर्ड भी लगा दिया गया है।

​गुप्त सूचना पर हुई त्वरित कार्रवाई

​एमडीडीए से मिली जानकारी के मुताबिक, विभाग को अजबपुर कला के सरस्वती विहार में नौटियाल और कटियार नामक व्यक्तियों द्वारा बिना किसी ले-आउट पास कराए, करीब आठ बीघा भूमि पर अवैध तरीके से कॉलोनी विकसित करने की खबर मिली थी। जांच में मामला सही पाए जाने पर संयुक्त सचिव प्रत्यूष सिंह के आदेशानुसार ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई की गई।

​इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए सहायक अभियंता निशांत कुकरेती, अवर अभियंता जयदीप राणा और सुपरवाइजर सहित भारी संख्या में प्राधिकरण के कर्मचारी मौके पर तैनात रहे।

​अधिकारियों की खरी-खरी: ‘गाढ़ी कमाई को जोखिम में न डालें’

​प्राधिकरण के उच्चाधिकारियों ने इस कार्रवाई को शहर के व्यवस्थित विकास के लिए एक जरूरी कदम बताया है। साथ ही जनता के लिए भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

​पूंजी की सुरक्षा: बिना स्वीकृत ले-आउट वाली जमीनों पर निवेश करने से आम लोगों की जीवनभर की कमाई डूब सकती है और वे कानूनी पचड़ों में फंस सकते हैं।
​सत्यापन जरूरी: किसी भी प्लॉट, मकान या प्रॉपर्टी को खरीदने से पहले एमडीडीए या संबंधित विभाग से उसकी वैधता की जांच अवश्य कर लें।

​”नियोजित और सुव्यवस्थित शहर हमारी प्राथमिकता है। अवैध प्लॉटिंग और बिना अनुमति के किए जा रहे निर्माणों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ यह कड़ा अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।”

— बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष (एमडीडीए)

 

​”जनता को धोखाधड़ी से बचाने और अनधिकृत विकास को रोकने के लिए विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। निवेश से पहले एमडीडीए से मंजूरी की स्थिति जरूर साफ कर लें, ताकि भविष्य में कोई आर्थिक नुकसान न हो।”

— मोहन सिंह बर्निया, सचिव (एमडीडीए)

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