देहरादून। रंगों के त्योहार होली पर जहाँ एक ओर प्रदेश भर में अबीर-गुलाल की धूम रही, वहीं दूसरी ओर हुड़दंग और लापरवाही के कारण सड़क हादसों और आपातकालीन मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। आपातकालीन सेवा ‘108’ के आंकड़ों के अनुसार, सामान्य दिनों की तुलना में होली के दौरान कॉल सेंटर पर सहायता के लिए फोन आने का सिलसिला सुबह से रात तक थमा नहीं।
कैम्प आपातकालीन सेवा 108 के महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट्स) अनिल शर्मा ने बताया कि 2 मार्च से 4 मार्च के बीच प्रदेश भर में कुल 1229 लोगों को आपातकालीन सहायता प्रदान की गई। चौंकाने वाली बात यह रही कि जहाँ सामान्य दिनों में सड़क दुर्घटना के प्रतिदिन औसतन 15 से 20 मामले आते हैं, वहीं होली के दौरान यह संख्या बढ़कर 165 तक पहुँच गई।
आंकड़ों पर एक नज़र (प्रदेश स्तर: 2-4 मार्च)
सड़क दुर्घटना (Trauma Vehicular): 165 मामले
प्रसव संबंधी (Pregnancy): 292 मामले
हृदय रोग (Cardiac): 66 मामले
अन्य स्वास्थ्य समस्याएं: 706 मामले
पुलिस सहायता: 165 मामले (जिन्हें तत्काल पुलिस कंट्रोल रूम को हस्तांतरित किया गया)
देहरादून जनपद की स्थिति
राजधानी देहरादून में भी आपातकालीन सेवाओं पर भारी दबाव देखा गया। अकेले देहरादून जनपद में 224 लोगों को ‘108’ एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुँचाया गया। इसमें प्रसव के 58, सड़क दुर्घटना के 36, हृदय रोग के 12 और अन्य बीमारियों के 118 मामले शामिल रहे।
स्वास्थ्य विभाग की ‘102 – खुशियों की सवारी’ सेवा ने भी इस दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंकड़ों के अनुसार, कुल 427 मामलों में सहायता प्रदान की गई, जिसमें 371 महिलाओं को प्रसव के बाद घर सुरक्षित पहुँचाया गया



