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वनाग्नि के खिलाफ उत्तराखंड वन विभाग की ‘महातैयारी’: 1438 क्रू स्टेशन और इंटर-एजेंसी समन्वय पर जोर

देहरादून: उत्तराखंड के जंगलों को आग से बचाने के लिए वन विभाग ने इस साल व्यापक रणनीति तैयार की है। मुख्य वन संरक्षक सुशांत कुमार पटनायक के अनुसार, आगामी 15 फरवरी से शुरू होने वाले आधिकारिक ‘फॉरेस्ट फायर सीजन’ के लिए विभाग पूरी तरह मुस्तैद है।

​ विभाग ने पूरे प्रदेश में 1438 क्रू स्टेशन स्थापित किए हैं, जहाँ स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित कर दी गई है।
​प्रदेश की 13,000 किलोमीटर लंबी फायर लाइन की साफ-सफाई का काम युद्धस्तर पर जारी है, ताकि आग को फैलने से रोका जा सके।
​फील्ड पर तैनात होने वाले फायर वॉचर्स के बीमा (Insurance) की योजना बनाई जा रही है, ताकि उन्हें सुरक्षा और मानसिक निश्चिंतता मिल सके।
​ वन पंचायतों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है और चीड़ के पिरुल (सूखी पत्तियां) के एकत्रीकरण का काम भी लंबे समय से किया जा रहा है।जब साथ आएंगे पुलिस और SDRF संसाधनों की सीमितता और समय की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन पर विशेष फोकस है।
​”11 फरवरी को FRI परिसर में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इसमें उत्तराखंड पुलिस, SDRF, NDRF और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे ताकि संकट के समय सभी एजेंसियां मिलकर काम कर सकें।”

— सुशांत कुमार पटनायक, मुख्य वन संरक्षक

​मॉक ड्रिल से परखी जाएगी ताकत
​तैयारियों को जमीन पर उतारने के लिए 13 फरवरी को पूरे प्रदेश में एक साथ मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। इससे विभाग की प्रतिक्रिया समय (Response Time) और उपकरणों की कार्यक्षमता का परीक्षण होगा।

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